मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार से पूरे राज्य में कयूं लगा दिया है। रविवार को प्रधानमंत्री के अनुरोध पर पूरे देश में सुबह 7 से रात 9 बजे तक जनता कयूं लगा था। जनता कर्म्य और सरकारी कर्ण्य में क्या फर्क है? 26/11 आतंकी हमला केस के मुख्य जांच अधिकारी रमेश महाले ने एनबीटी से कहा कि जनता कपy में जनता ने अपनी इच्छा से खुद को घर में बंद किया था। पर सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कयूं लगाने का बाकायदा आदेश निकाला है। आदेश और इच्छा में फर्क होता है। आदेश के बाद अब पुलिस को क! का उल्लंघन करने वालों पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के अधिकार मिल गए हैं। इंस्पेक्टर किरण कवाडी के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार ने धारा 144 लगा दी है। इसका उल्लंघन करने पर बॉम्बे पुलिस ऐक्ट के सेक्शन 37 और आईपीसी के सेक्शन 188 के तहत पुलिस किसी को भी अरेस्ट कर सकती है। रमेश महाले बताते हैं कि सेक्शन 188 म आरापा का छह महान तक का सजा का प्रावधान है। उनका कहना है कि अमूमन जब दंगे होते हैं, तब ही कयूं लगाया जाता है। उस दौरान पुलिस कयूं का उल्लंघन करने वालों पर दंगा करने या करवाने. प्रॉपर्टी डैमेज या मर्डर के भी सेक्शन लगाती है, यदि उस तरह के उसने अपराध किए तो। जुर्म साबित होने पर ऐसे अपराधियों को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा होती । लेकिन, अभी कोरोना की वजह से भी इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पब्लिक पर जो कयूं लगाया गया , उसमें भी कानून तोड़ने वाले आरोपियों को मुकदमे की पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
कुछ दिन घर पर रहो या 6 महीने जेल में
• Devendra Khanna